सोमवार, 24 दिसंबर 2012

क्या होगा इन्साफ, देश की महिला मांग रही है हिसाब ?

हमारे  देश का इतिहास सदियों से स्त्री जात को घर की लक्ष्मी तो कहता आया है लेकिन लक्ष्मी की जहा मंदिरों में पूजा अर्चना की जाती है पर उसके साथ फिर ये दरिंदगी से भरा सलूक किस लिए ? क्या हम लोग जब पूजा करते है तो भूल जाते है कि पूजा जिसकी हो रही है वह एक स्त्री है ? ना ना लेकिन उस वक्त तो ये महानुभाव आँखे मूंद कर ध्यान में लीन होकर भूल जाते है की ये उसी देवी की आराधना कर रहा है, उसी का अंश इस देश में महिला को ये लोग बताते आये है ! जब भी किसी व्यक्ति को समाज या आस पड़ोस में आपने को आच्छा साबित करना होता है तो वो नारी शक्ति का गुणगान करता नहीं थकता ! तो फिर ये भेदभाव और जघन्या अपराध भी इन्ही के साथ ही क्यों ? क्या आपने कभी सोचा है की इन अपराधों से देश भर में महिलाओं के प्रति लोगो में कही  न कही ये बात उठती जा रही है कि सरकार का ये कहना "बेटी बचाओ " कितना सही है ? क्या इन दरिंदो के लिए बैटियो को बचाया जाए ! अब तो एक माँ दुआ करती होगी की उसे बेटी न हो तो अछा ! तो क्या इस देश की कल्पना कर रहे थे हम ? जो देश पुरे विश्व में अपने प्रेम भाई चारे और सौहार्द के लिए विख्यात था ,  वहां आज साँस लेना भी मुश्किल लग रहा है ! देश भर में आज बलात्कार के खिलाफ आवाज एक गूंज में उठ रही है! और देश की सरकार इसी आवाज को अगर दबाती है तो वो दिन भी दूर नहीं जब देश में किसी की भी माँ बेटी सलामत नहीं रहेगी ! क्यों सरकार  इस पर ध्यान नहीं दे रही है ! आज देश का हर समजदार पड़ा लिखा नोजवान इसका विरोध कर रहा है, तो सरकार को वक्त रहते कुच्छ करना चाहिए और इस  तरह की कोई घटना देश में दुबारा न हो ऐसा प्रावधान करना ही होगा ! ये लोग जो विजय चौक पर खड़े न्याय की गुहार लगा रहे है ये तो वो लोग है जो दिल्ली में रहते है jab इनको संभल पाना अगर इतनी मुश्किलों भरा हो सकता है तो अभी तो देश में सौ करोड़ से उपर की आबादी बाकी है ? सरकार को चाहिए की देश की तरककी का माध्यम बने ना की बर्बादी का कारण ! जब देश के  लोगो ने केवल 30 करोड़ आबादी से सौ बरस की गुलाम जिन्दगी को उखाड़ फैंका तो क्या ये सरकार नहीं बदल सकती ? देश की भलाई में ही हमारे नेताओं की भलाई है !