शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

पीड़िता के गांव में क्यों दहशत में हैं लड़कियां?

बीए में पढ़ने वाली शांति को जब से दिल्ली सामूहिक बलात्कार और बाद में पीड़ित की मौत के बारे में पता चला है, तब से उनके भीतर डर बैठ गया है.
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में शांति का घर 23 वर्षीय बलात्कार पीड़ित छात्रा के परिवार के घर से थोड़ी ही दूर है.
शांति का कहना है, “पहले मैं बेफिक्र घर से बाहर चली जाती थी. अगर शाम को छह बजे भी बाहर जाना होता था तो पापा के बिना बाहर चली जाती थी, लेकिन अब पापा के साथ ही बाहर जाती हूं.”
डर इतना गहरा था कि शांति ने बीए की अपनी प्रैक्टिकल परीक्षा भी छोड़ दी.

पढ़ने की चाह

शांति के अध्यापक उनकी अनुपस्थिति का कारण जानने उनके घर तक पहुंच गए. शांति ने बताया कि कुछ लड़कियां तो स्कूल ही नही गईं.
"पहले मैं बेफिक्र घर से बाहर चली जाती थी. अगर शाम को छह बजे भी बाहर जाना होता था तो पापा के बिना बाहर चली जाती थी, लेकिन अब पापा के साथ ही बाहर जाती हूं."
प्रियंका, पीड़ित के गांव की एक लड़की
इस बेहद पिछड़े इस गांव में दूर-दूर तक स्कूल नहीं है. लेकिन यहां की लड़कियां पढ़ना चाहती हैं. हमने गांव की मुश्किल राहों से गुजरकर अपनी साइकिलों पर स्कूल जाती कई लड़कियों को देखा.
शांति का कॉलेज 16 किलोमीटर दूर है, और वो भी ये सफर साइकिल से तय करती हैं.
रास्ता इतना खराब और ऊबड़-खाबड़ है कि यहां से गाड़ी का निकलना भी मुश्किल हो जाता है.
एक गांव वाले ने बताया कि बरसात में रास्ता इतना खराब हो जाता है कि कई मरीजों की तो रास्ते में ही मौत हो गई क्योंकि उन्हें सही समय पर अस्पताल नहीं ले जाया जा सका.

पढ़ाई पर असर

कक्षा दस में पढ़ने वाली प्रियंका भी डरी हुई हैं. उन्होंने बताया कि घटना के बाद रास्ते में लड़कों के एक गुट को खेलते हुए देखने मात्र से उनमें दहशत बैठ जाती है.
प्रियंका के माता-पिता को भी समझ में नहीं आ रहा है कि इस स्थिति से कैसे निपटें.
प्रियंका की माँ कहती हैं, “सरकार को महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जरूर कुछ न कुछ करना चाहिए.”
लड़कियों की शिक्षा
ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा अब भी बहुत आसान नहीं है
उनके पिता कहते हैं कि असुरक्षा के इस माहौल का असर लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ेगा.
बलात्कार पीड़ित छात्रा की तरह यहां की तमाम लड़कियां अपना भविष्य बनाना चाहती हैं.

कड़ी सजा की मांग

गांव के पुरूषों को मैंने बार-बार ये कहते सुना कि इस इलाके में छेड़छाड़ की घटनाएं नहीं होतीं, लेकिन जब मैंने पुरुषों के सामने लड़कियों से पूछा कि क्या ये सच है तो एक लड़की ने अलग ही कहानी बताई.
उसका कहना था कि गांव में उन्हें भी छेड़खानी का सामना करना पड़ता है, और ऐसी कई बातें है जो दबा दी जाती हैं.
इस बात पर आसपास के युवकों ने आश्चर्य जताया.
गांव वालों ने बताया कि कुछ हफ्तों पहले ही एक सात साल की बच्ची के कथित बलात्कार को लेकर यहां बहुत हल्ला मचा था.
दिल्ली में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना के अभियुक्तों के लिए यहां के लोग कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं.
गांव में गुस्सा है और लोग चाहते हैं कि दोषियों को मृत्यु दंड मिले.
कई लोग तो ऐसी भयानक सजा दिए जाने की बात करते हैं जिसका वर्णन करना भी मुश्किल है.
गांव वाले इन खबरों को सुनकर भी नाराज़ हो जाते हैं कि छह अभियुक्तों में से एक नाबालिग है और उसे कम कठोर सज़ा मिल सकती है.
 पहले मैं बेफिक्र घर से बाहर चली जाती थी. अगर शाम को छह बजे भी बाहर जाना होता था तो पापा के बिना बाहर चली जाती थी, लेकिन अब पापा के साथ ही बाहर जाती हूं."
प्रियंका, पीड़ित के गांव की एक लड़की